जिले में इस साल आलू की बंपर फसल किसानों के लिए अच्छी खबर नहीं, बल्कि चिंता का सबब बन रही है.
बाराबंकी : जिले में इस साल आलू की बंपर फसल किसानों के लिए अच्छी खबर नहीं, बल्कि चिंता का सबब बन रही है. हालांकि प्रोडक्शन करीब 850,000 मीट्रिक टन तक पहुंच गया, लेकिन मार्केट में कम डिमांड और कोल्ड स्टोरेज की सीमित कैपेसिटी की वजह से आलू की कीमतों में लगातार गिरावट आई है.
जिले में 77 कोल्ड स्टोरेज वेयरहाउस हैं, जिनमें करीब 750,000 मीट्रिक टन आलू स्टोर करने की कैपेसिटी है. इनमें से आधे से ज़्यादा कोल्ड स्टोरेज कैपेसिटी पहले ही भर चुकी हैं, जिससे कई किसानों को स्टोरेज की जगह के लिए इंतज़ार करना पड़ रहा है.
पिछले साल आलू करीब ₹1,400 प्रति क्विंटल बिका था, जबकि इस साल कीमतें गिरकर करीब ₹600 प्रति क्विंटल रह गई हैं. आलू ट्रेडर्स ने कहा कि सभी इलाकों में अच्छी फसल होने के बावजूद, पिछले साल हुए भारी नुकसान की वजह से वे ज़्यादा खरीदने का रिस्क नहीं ले रहे हैं. देवा और फतेहपुर जिले में आलू उगाने वाले मुख्य इलाके माने जाते हैं, जहां बड़ी संख्या में किसान आलू की खेती करते हैं।
किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मार्केट में मांग बढ़ने से कीमतें बेहतर होंगी, लेकिन हालात मुश्किल बने हुए हैं। हॉर्टिकल्चर इंस्पेक्टर सौरभ कुमार सिंह ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज अभी करीब 60 परसेंट भरे हुए हैं। किसानों को आलू स्टोर करने में कोई दिक्कत नहीं होगी, क्योंकि प्रोडक्शन के मुकाबले यहां काफी जगह है।